सोमवार, 9 जून 2014

अनमोल धन...

माँ-बाप की सेवा कर लेँ हम जिवन सफल बना जायेँगे | इनकी पूजा करने से तो देवता भी खुश हो जायेँगे|| पर विसंगती की पहले प्यार को कभी भुलाया नहीँ जा सकता और हम पहले ही प्यार को भुल जाते है ? खैर मित्रो कल शाम थी तो आज नई  सुबह जरुर होगी , अपनी भुल-चुक हम सुधार ले, इस नई सुबह से जिन्दगी सुहानी होगी ... (((((((((( सु-प्रभात )))))))))
҉‿↗⁀҉ मित्रवर ҉‿↗⁀҉
आपका दिवस मंगलमय हो ..

मै निकल पड़ा हूँ .....

मै निकल पड़ा हूँ .....
मै निकल पड़ा हूँ उस पथ पर ,
जिस पथ शोले उगलते अँगारे है ||
पर लिए हौसला बुलंदियाँ छुने का,
अब मुझे बढ़ते रहना है हर हालो मे ||
भूख गरिबि दरिद्रता से पेच लड़ा अब,
लड़ने चला हूँ उन्ही गलियारो मे ||
पद लोलुप्ता का मोह नहीँ मन मे
नेकी करने चला हूँ हर घर-द्वारे मे | |
दिखे शेर सा सुन्दर हो मोर सा,
भारत मढ़ने चला हूँ खेत-खलियानो मे||
!!*!!* जय हिन्द*!!*!! वन्दे मातरम् *!!*!!
~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शनिवार, 7 जून 2014

जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।

जमीं हो गगन हो, अमन हो चमन हो,
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो,

नए सिलसिले हैं, बढ़े हौंसले हैं,
सभी साथ आओ, यही गीत गाओ,
झुकेंगे नहीं अब,  सर-मेरे कफ़न हो।
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।

हो पहला तिरंगा, मइया जिसकी गंगा,
वर्षों विलग हों, रहती फिर भी चंगा,
ऐसा मेरा भारत, तो कैसे पतन हो।
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।

हम नहीं रुकेंगे, चलेंगे चलेंगे,
माँ के आबरू को, शिखर पे रखेंगे,
जहाँ में ये भारत, सभी का सपन हो।
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।
_______जय हिन्द_______
दिनाँक___०७/०६/२०१४
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या।

शनिवार, 24 मई 2014

जय हिन्द


हमारे भारत की संस्कृति :-
गौ सेवा से जानी जाती है
परोपकार से जानी जाती है,
लज्जा/इज्जत/सम्मान से जानी जाती है,
योगपूर्णता से जानी जाती है।
दैविक सक्तियों के उपज से जानी जाती है,
"
परन्तु:-
गौ भक्षण से कदापि नहीं,
मन्सो के बाजार में वृद्धि से कदापि नहीं,
बेइज्जती/नग्न होकर चलने से कदापि नहीं,
समलैंगिगता को हरी झंडी दिखाने से कदापि नहीं,
लाचारी से कदापि नहीं।
"
इसलिए सत्ता छीनना बहुत जरूरी था।
जिस तरह प्राचीन काल में क्षत्रिय होने के नाते एक राजा होने का अधिकार होता था,
ठीक उसी तरह एक भारतवासी होने के नाते भारत माता की छिनती  इज्ज़त आबरू (भारतीय संस्कृति) को बचाने के लिए प्रत्येक का कर्तव्य एवं धर्म हो जाता है।
""""""""""
मोदी जी ने नवाज शरीफ को अपने अनुसार न्योता दिया है, वे भारत-हृदय हैं, इसलिए भारत-विरोधियों से पूंछ कर नहीं अपितु अपनी संस्कृति अनुसार और भारतीयों से समझ कर फैसला करने में पूर्ण स्वतंत्र हैं।

इसे पढ़ने वाले एक बार जय हिन्द अवश्य लिखें।
*******जय हिन्द JAY HIND

शुक्रवार, 23 मई 2014

जय हिन्द, जय हिंदुत्व

सादर नमन ! स्वजनों !
*******
आजकल बहुत से लोग इस बात को लेकर चिंतित और बहुत विरोध में हैं, खासकर के कोंग्रेसी बहुत विरोध और आरोप लगा रहें हैं कि, "श्री मोदी जी ने शपथ ग्रहण के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को न्योता क्यों दिया।
"""""""
दुख की बात तो यह है की श्री नरेंदर मोदी जी को समझने का प्रयास कोई नहीं कर रहा है और अपनी मानसिकता खोये जा रहे हैं।
"
आरोपियों और विरोधियों को भी यह भलीभांति मालूम है कि श्री मोदी जी माननीय श्री अटल जी के पदचिन्हों पर चल रहे हैं, और उससे भी पहले वे भगवान श्री राम के बताये गये मार्गों एवं आदेशों का पालन कर रहें हैं।
"
इसमें से रामायण पूरा न सही तो थोड़ा बहुत सभी को मालूम होगा अथवा सीरियल पर देखे होंगे।

सबको यह ज्ञात होगा,
"
रावण जब खुद ही यज्ञ करावे,
है कौन जो भंग करन को आवे।
~~~~~~~~~APM
अर्थात:- लंका पर चढ़ाई करने हेतु मार्ग बनाते समय भगवान श्री राम ने स्वयं लंकापति रावण को महापंडित एवं महाविद्वान की उपाधि देकर पूजा संपन्न करने को बुलवाया था।
अब,
     जब स्वयं लंकापति ही पूजा को संपन्न कराएगा, तो ऐसी किसकी हस्ती है जो पूजा भंग कराएगा।
*******
अब हमने बहुत कुछ खंडन कर दिया, अब आप बुद्धिजीवी स्वयं हमारा आशय समझने की कृपा करें/-
क्योंकि हम किसी पर बिना सुबूत के आरोप लगाकर आरोपी नहीं बनना चाहते।
******
आपका शुभचिन्तक___अंगिरा प्रसाद मौर्या।
_____________________________
          !!*!!जय हिन्द!!*!!
_____________________________

बुधवार, 9 अप्रैल 2014

जय हिन्द

कतरों-कतरों में लिपटा लुट रहा है चमन,
दे के अग्नी-परीक्षा जो मिला था जनम,
क्यों बने आज दुश्मन उसी भारत के हम,
बना मत्भ्रष्ट भारत व दरिन्दे-सनम ||

युवाओं तुम मिल के अब खाओ कसम,
ना पनपने देंगे विष व क्रूरता-अधम,
सभ्यता का अपने अब रोको पतन,
आओ आजादी को अपने बनाएँ सनम ||

न देगा कोई अब "भगत सिंह" को जनम,
न होंगे "सुभाष" यहाँ रण के गरम,
होंगे न "बापू" अब ओ अहिंसा-परम,
क्योंकि होता यहाँ बस "मतों" का हनन ||

बाँट सम्प्रदायों की करके आज करते गुणन,
हैं "दिवाली" को कटते यहाँ "गायों" के 'मटन',
सहा जाता नहीं अब सभ्यता का पतन,
कि जय हिन्द कहते आज आये शरम ||

क्या सुधरेगा भारत या यूँ होगा दमन,
क्या सहेगी ये जनता अत्याचारो-जघन,
गर ताकत है हममे चलो कर जाएँ गमन,
बस भ्रष्टों के भ्रष्टता का करके दहन ||

घाव हैं हिन्द के तो तुम हो मरहम,
पाँव हैं हिन्द के तो तुम अगला कदम,
चलो ऐसा कि पीछे हो पूरा वतन,
दुश्मन हैं निर्मम, बनो तुम भी जघन ||

घोष करो जय हिन्द का कि गूँजे गगन,
संतोष किये तो सूखे ये शांति-अमन,
सांप्रदायिक विवादों का कर दो दफ़न,
कि मिट जाये दुनियां का तुरत ही वहम ||

~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनांक:- ०९/०४/२०१४ 

जय हिन्द (दिनांक:-०७/०३/२०१४ से संशोधित)

मुफ्त में देंगे कहने को बस, बना सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं,
सत्ता आने पर फिर देखो, काल ही बन के मडराते हैं।

हमें मुफ्त का नहीं चाहिए, अभी मार्ग बस सही चाहिए,
हमे मुफ्त से क्या लेना है, मेहनत की जो हम खाते हैं।

कर्म-विमुखता पे ना भागो, भारत माँ के पुत्रों जागो,
"मौर्य" हमें उनसे क्या लेना, जो आज यहाँ कल ढा जाते हैं।

दीन-हीन को कौन दुहाई, करते धनिकों की चटुआई,
असहाय जो हक़ की पाना चाहे, धनिक यहाँ पर गुर्रा जाते हैं।

~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-०७/०३/२०१४

रविवार, 6 अप्रैल 2014

अत्याचार पे एक प्रहार

सबका यही है नेक विचार,
अब आये मोदी सरकार।
भ्रष्टाचार का हो प्रतिकार,
अब आये मोदी सरकार।

व्यक्ति-व्यक्ति का हो सत्कार,
समहित सत्ता औ व्यापार,
मोदी इसपर ग्रेट प्रहार,
मोदी इस पर ग्रेट प्रहार !
अब आये मोदी सरकार।

जातिवाद का फुटमत छोड़ो,
हिन्द से अपनी सहमति जोड़ो,
मोदी का ये एक विचार,
मोदी का ये एक विचार?
तब आये मोदी सरकार।

हम भी अपनी कुछ कहते हैं,
जनकल्याण में नित रहते हैं,
वोट-बैंक का हो संहार
सबसे मेरी एक गुहार
ले आओ मोदी सरकार।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या।
दिनाँक:- ०६/०४/२०१४
~~~~~~~~~APM

शनिवार, 5 अप्रैल 2014

जय हिन्द

सुन मुस्काता कभी खबर तो, कभी महीनों रो जाता हूँ,
भारत माँ की हालत ऐसी, सहम सहम के सो जाता हूँ।

हर मुद्दा है यहाँ विवादित, कूटनीति से ये उत्पादित,
वोट बैंक से सब आधारित, दुष्टों द्वारा ये प्रतिपादित।
यहाँ उलझ मै खो जाता हूँ, सहम सहम के सो जाता हूँ।

एक दिन मश्जिद के जगराते, एक दिन जा वो घंट बजाते,
एक दिन अल्ला को ठुकराते, एक दिन राम को झूठ बताते।
देख ये पेसा रो जाता हूँ, सहम सहम के सो जाता हूँ।

भारत माँ के पुत्र लड़ाते, हिन्द-सभ्यता को रुकवाते,
जनहित बस परचार यहाँ पर, रोज यहाँ एक विपदा लाते।
देख ये हालत रो जाता हूँ, सहम सहम के सो जाता हूँ।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- ०५/०४/२०१४
       !!*!!जय हिन्द!!*!!