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रविवार, 6 अप्रैल 2014

अत्याचार पे एक प्रहार

सबका यही है नेक विचार,
अब आये मोदी सरकार।
भ्रष्टाचार का हो प्रतिकार,
अब आये मोदी सरकार।

व्यक्ति-व्यक्ति का हो सत्कार,
समहित सत्ता औ व्यापार,
मोदी इसपर ग्रेट प्रहार,
मोदी इस पर ग्रेट प्रहार !
अब आये मोदी सरकार।

जातिवाद का फुटमत छोड़ो,
हिन्द से अपनी सहमति जोड़ो,
मोदी का ये एक विचार,
मोदी का ये एक विचार?
तब आये मोदी सरकार।

हम भी अपनी कुछ कहते हैं,
जनकल्याण में नित रहते हैं,
वोट-बैंक का हो संहार
सबसे मेरी एक गुहार
ले आओ मोदी सरकार।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या।
दिनाँक:- ०६/०४/२०१४
~~~~~~~~~APM

शनिवार, 5 अप्रैल 2014

जय हिन्द

सुन मुस्काता कभी खबर तो, कभी महीनों रो जाता हूँ,
भारत माँ की हालत ऐसी, सहम सहम के सो जाता हूँ।

हर मुद्दा है यहाँ विवादित, कूटनीति से ये उत्पादित,
वोट बैंक से सब आधारित, दुष्टों द्वारा ये प्रतिपादित।
यहाँ उलझ मै खो जाता हूँ, सहम सहम के सो जाता हूँ।

एक दिन मश्जिद के जगराते, एक दिन जा वो घंट बजाते,
एक दिन अल्ला को ठुकराते, एक दिन राम को झूठ बताते।
देख ये पेसा रो जाता हूँ, सहम सहम के सो जाता हूँ।

भारत माँ के पुत्र लड़ाते, हिन्द-सभ्यता को रुकवाते,
जनहित बस परचार यहाँ पर, रोज यहाँ एक विपदा लाते।
देख ये हालत रो जाता हूँ, सहम सहम के सो जाता हूँ।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- ०५/०४/२०१४
       !!*!!जय हिन्द!!*!!

बुधवार, 19 मार्च 2014

चहु ओर तिरंगा फहराता मैं

कुछ और यहाँ पर कह जाता मैं
अपने मन की कर पाता मै
पाक कहीं हो चीन कहीं हो
चहु ओर तिरंगा फहराता मैं।

"मौर्य" यहाँ की रीत पुरानी,
सत्कार में बहता गंगा-पानी,
करतार भी हमरी नित गुन गाता,
कुछ चयन यहाँ पर कर पाता मैं।

उनको देखो जनहित जारी,
जेब है उनकी उससे भारी,
यँह करुण न करती भारत माता,
ऐसी निति-प्रखर आता मैं।

सपूत हिन्द क्या एकजुट होंगे,
जातिवाद के नित-नित दंगे,
निति यहाँ तब भ्रष्ट न होती,
ले बना कारवाँ चल पाता मैं।

उनको धन की कमी कहाँ है,
पूरा भारत देश जहाँ है,
एक दिन कुर्सी बदल जाएगी,
ना ऐसी शंका कर पता मै।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- १९/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM
!!*!!जय हिन्द!!*!!
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है मोदी भारत-शान अब, सब मोदी से घबराँय।
भ्रष्टों की हुलिया अब ऐसी, सर्वत्र रहें चिल्लाँय।।
~~~~~~~~~APM

शुक्रवार, 7 मार्च 2014

जय हिन्द

!!*!!जय हिन्द!!*!!
मुफ्त में देंगे कहने को बस, बना सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं,
सत्ता आने पर फिर देखो, काल ही बन के मडराते हैं।

हमें मुफ्त का नहीं चाहिए, अभी मार्ग बस सही चाहिए,
हमे मुफ्त से क्या लेना है, मेहनत की जो हम खाते हैं।

कर्म-विमुख नहीं होना है अब, ना किसी सहारे सोना है अब,
"मौर्य" हमें उनसे क्या लेना, हैं आज यहाँ कल ढा जाते हैं।

दीन-हीन को कौन दुहाई, करते धनिकों की चटुआई,
असहाय जो हक़ की पाना चाहे, धनिक यहाँ पर गुर्राते हैं।

~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-०७/०३/२०१४
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दोहा:-

भ्रष्टाचार को देख के, अब मोदी हैं बौराय,
सहत-सहत नहीं अब सहे, लियो है अस्त्र उठाय।१।
~~~~~~~~~APM

कण-कण बोले मोदी मोदी, नमो है जब से आय।
भ्रष्ट वहाँ अब त्रस्त हैं, नमो जहाँ तक जाय।२।
~~~~~~~~~APM

सोमवार, 20 जनवरी 2014

हमें FDI युक्त नहीं FDI मुक्त भारत चाहिए

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ममानानीय श्री मोदी जी के समर्थकों से विशेष अनुरोध एवं आग्रह है कि कृपया इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा संख्या में शेयर/share करें जिससे यह संदेश मोदी जी तक पहुँचाया जा सके।
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भारत में FDI जिसे गँवारा नहीं,
है ये भारत उसे भी प्यारा नहीं।

है FDI जिसे भारत में गँवारा,
वही है भारत न्यारा
उसी को हिन्द प्यारा।
~~~~~~~~~APM
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FDI:- भारत में विदेशी कंपनियों का या विदेशी पूँजी निवेश। अर्थात भारत में विदेशी कंपनियों का स्थापित्य एवं पूर्ण उद्योग लाइसेंस।
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हमारी श्री मोदी जी से विनती है कि वे भी राष्ट्रीय स्तर पर FDI को ना मंजूर करने की घोषणा करें। हमारा दावा है कि इस घोषणा के उपरांत उनको लोकसभा में अवश्य पूर्ण बहुमत प्राप्त होगा। और अपनी घोषणा पर खरा भी उतरें।
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विगत दो चार दिन पहले हमने सुर्ख़ियों में पढ़ा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने FDI को नामंजूरी दे दी और उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर हम केंद्र से भी बात कर लेंगे। इस समाचार को पढ़कर तो हमने केजरीवाल को दिल से धन्यवाद दिया और शाबासी भी।
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लेकिन दुःख इस बात का है की गरीबी से लेकर अमीरी के वहदे तक के अनुभवशाली एवं एक परिपक्व व्यक्ति श्री मोदी जी के बारे में लोग आजकल बहुत उल्टा-सुलटा लिखने लगे हैं। और मैं इसे सहन नहीं कर पा रहा हूँ। इसीलिए हमने खुलेतौर पर केजरीवाल जी को धन्यवाद भी ना दे पाया।
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हम आपको बताना चाहते हैं कि इतिहास गवाह है:-
ईस्ट-इंडिया थी एक कंपनी, जो नमक बेचने आयी थी।
भारतवासी के जन-जन को, छट्ठी का दूध याद करायी थी।।
~~~~~~~~~APM द्वारा 2012 में ही संकलित।

हमारा तात्पर्य यह है कि,"जब एक विदेशी कंपनी भारत में आयी थी"। वो भी नमक बेचने। तो उसके प्रभाव से भारत परतंत्र/गुलाम हो गया था। तो जब FDI के जरिये दो दर्जनों से भी ज्यादा कम्पनियाँ भारत में निवेश करेंगी फिर इस पहले से लुटे भारत की क्या हालत होगी। मैं यह कहना चाहता हूँ जब हमारी नित्य-योग्य प्रत्येक वस्तुएँ भी किसी मौल में सड़को गलियों की दुकानों से सस्ती बिकेंगी। तो कौन है इस महँगाई में जो स्वदेशी दुकानों से सामान खरीदेगा!
फलस्वरूप सभी भारतीय दूकानें या तो बंद हो जायेंगी या फिर उन्हें उस मौल का एक हिस्सा बना लिया जायेगा। तात्पर्य:- किसी भी तरह कुछ भी बिकेगा उसका लाभ/फायदा विदेशी कंपनियों को भी होगा। और जैसे ही उनकी निति पुर्णतः सफल हुई तुरंत उनके चीजों के भाव आसमान में उड़ रहे होंगे। हम गरीबों की तो बात ही छोड़ें मध्यम वर्ग के लोगों को भी रोटी चावल सही से नहीं नशीब हो पायेगा।
ऐसी हम कल्पना करते हैं अपने FDI युक्त भारत की।
……………यदि आप भी कोई विचार देना चाहते हैं तो अवश्य दें। और सहमत हैं तो FDI मुक्त भारत के लिए एक शेयर/share जरूर करें।……………

और अब अंत में हम पूर्ण रूपेण कहते हैं कि जो राष्ट्रीय स्तर पर FDI को नामंजूर करेगा।
हम अपने दिनचर्या के बचे-खुचे समय में से उसी का प्रचार प्रसार करेंगे। उसी को समर्थन देंगे अपनी प्रत्येक बातों के जरिये।
!!*!!जय हिन्द!!*!!
!!*!!जय भारत!!*!!
…………………APM…………………

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

जय हिन्द

यूँ देखो करते हैं चटुआई,
जम के करते हैं प्रभुताई,
वोट दीजै प्रभु शरणागत को,
चरण पकड़ के करत दुहाई।।

सज्जन को तो राम राम की,
दुर्जन को व्हिस्की बड़े काम की,
लगता दुनियाँ के पालक हैं,
मदद वाहनों से धूमधाम की।।

वर पायो जब पंचवर्ष का,
नित देखो करते ठगड़ाई
हमहीं प्रभु हैं,हमहीं हैं दाता,
हस कर लेते हैं अंगड़ाई।।

मुझे तो लगता ये नहीं हैं मानव,
लक्षण से दिखते हैं दानव,
हिन्द सभ्यता टूट चुकी अब,
है परिवर्तित दानव में मानव।।

है दूषित इनकी काया देखो,
नित गर्भित भव-माया देखो,
कदम-कदम पर रिश्वत-खोरी,
था जाल यही बस साया देखो।।

"मौर्य" कहत प्रतिकार करो अब,
कल्कि रूप अवतार करो अब,
त्राहि-त्राहि है चाहँुदिश छायो,
हिन्द को तारमतार करो अब,
दिनांक~~~~~~~~~२७/११/२०१३
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
~~~~~~~~~APM
[साया - अल्प प्रभाव (पूर्ण प्रभाव सरेआम{प्रत्यक्ष} लूट-पाट या डकैती तो कर नहीं पाएंगे। अतः इनकी आज्ञा के शिकार जो कार्यकर्ता कार्य करते हैं उनपर एवं उनके कार्य पर इन दुर्जनों की ही साया रहती है।